बुधवार, 6 दिसंबर 2017

उलझने जिंदगी की................ या लोगों ने उलझा लिया खुद को


जिंदगी को कितना उलझा लिया है हमने मैं सोचती हूँ ऐसा क्यों ? तो मेरे दिमाग में ये सारी चीज़ें एक-एक करके आने लगती हैं। जैसे कि कई बार हमारे पास सब कुछ होता है । (सब कुछ से मेरा मतलब उन सारी चीज़ों से है जो कि एक इंसान की जरूरत पूरी करने के काम आती है ) फिर भी न जाने क्यों किसी चीज़ की कमी महसूस होती हैं। सबके लिए ये कमियां, अलग-अलग  हो सकती हैं जैसे किसी को मुकम्मल सुकून नहीं मिल पाता तो , किसी को कोई ऐसा इंसान नहीं मिल पाता जिसकी उसे जरूरत या चाहत होती है वैसे मेरा मानना तो यह है कि हमारी जरूरत किसी और इंसान से भी पूरी हो सकती है लेकिन चाहत सिर्फ एक ही के लिए होती है और उस चाहत के जज़्बात और एहसास भी किसी एक इंसान के साथ ही जुड़े होते हैं।
अब हमारे समाज में दो व्यक्तियों की जो एक दूसरे के प्रति जरूरत होती हैं। उन्हें सिर्फ शारीरिक जरूरत से जोड़कर देख लिया जाता हैं। लेकिन असल में ऐसा होता नहीं है। हां ये जरूर है कि इन जरूरत की पूर्ति के साथ किसी नन्ही सी जान का निर्माण हो जाएं। पर जो दो लोगों की चाहत होती है वो पूरी नहीं हो पाती। (अब ये दो लोग कौन है , यह दो लोग वो है जो समाज , परिवार , जाति , धर्म , की वजह से एक नहीं हो पाते......) और इनकी चाहत अधूरी रह जाती है। हां पर वक्त के साथ इनकी जरूरतें पूरी होती रहती हैं। अब ऐसे लोगों को सुकून नहीं मिल पाता। तो फिर ऐसे में व्यक्ति खुश भी नहीं रह पाता और वह अपनी जिंदगी को उलझा लेता है।
कई बार एक दूसरा ही पहलू देखने को मिलता है जैसे कि एक इंसान बहुत कामियाब है या कामियाब होता जा रहा है। अब ऐसे में उसे थोड़ी सी भी कामियाबी से सब्र नहीं आता और अगर उसे ज्यादा कामियाबी भी मिल जाये तो फिर उस कामियाबी से भी उसे सुकून नहीं मिलता और वो हर समय ये ही सोचता रहता है कि और कामियाबी कैसे हासिल की जाएं ? कैसे कॉम्पिटिशन के दौर में खुद को सबसे ऊपर लाया जाएं ?
अब कुछ लोगों ने अपनी जिंदगी को कुछ इस तरह उलझा लिया है कि वह करते तो कुछ नहीं है लेकिन दूसरों से और उनकी कामियाबी से जलते रहते हैं। वह यह भी चाहते है कि उन्हें भी वो सब मिले जो सामने वाले व्यक्ति को मिल रहा है। अब वो दिन रात बस यही सोचने में निकाल देते है लेकिन वो कुछ हासिल करने के लिए मेहनत नहीं करते है जो कि गलत है क्योंकि सामने वाला इंसान अपनी मेहनत से कामयाबी हासिल कर रहा है। बिना मेहनत करे कुछ हासिल करने की चाह रखने वाले लोग अपने आप ही अपनी जिंदगी में उलझने पैदा करते है। ऐसे में इंसान के अंदर ईर्ष्या की भावना आ जाती है और वह अंदर ही अंदर मरता चला जाता है। 

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